nutrition-science पोषणशास्त्र
पोषण के बारे में आर्युवेद की राय

आर्युवेद में मानते है कि हर एक भोज्य पदार्थ का गुण-प्रभाव होता है। भोज्य पदार्थ शरीर के लिए अच्छे, हानिकारक या उदासीन हो सकते हैं। यह उन चीज़ों के गुण, व्यक्ति- प्रकृती मौसम और स्थानीय पर्यावरण पर निर्भर करता है।

सात धातु

आर्युवेद कहता है कि सात बुनियादी तत्व मिल कर शरीर की धातु बनाते हैं। ये हैं रस (अन्नरस), रक्त (खून), मॉंस (पेशियॉं), मेदा (वसा), अस्थि (हडि्डयॉं), मज्जा और शुक्र। खाने की अलग-अलग चीज़ें अलग-अलग धातुओं को विशिष्ट ढंग से प्रभावित करती हैं। (आज की चिकित्सीय समझ के अनुसार इस तरह का वर्गीकरण और अवधारणाएँ काफी अजीब लग सकतीं हैं)।

त्रिदोष
Groundnuts and Gram

मुंगफली और चना रुक्ष याने सुखे आहार माने जाते है
जिसे बद्धकोष्ठ की तकलीफ होती है

Coriander

धनियॉं शीतल गुणों का माना जाता है
इससे शरीर में पित्तदोष का शमन होता है

शरीर के गठन में तीन तरह के दोष वात, पित्त और कफ की प्रवृति होती है। हॉलाकि ये दोष नही बल्कि शरीर गठन का स्वरूप है। ये पॉंच मूल तत्वों- यानि पंच – महा – भूत – यानि हवा, आग, पानी, धरती और आकाश के विशिष्ट गठजोड़ों के मिलन के कारण होती है। आहार और कुछ एक गतिविधियों के कारण ये दोष बढ़ या घट सकते हैं। इनके बढ़ने या घटने से गड़बड़ियॉं और बीमारियॉं हो जाती हैं। हर व्यक्ति का शारीरिक गठन एक या ज़्यादा दोषों से प्रभावित होता है।

खाने की सभी चीज़ें कुछ हद तक इन दोषों को कम या ज़्यादा करते हैं। जैसे कि चावल और दूध कफ बढ़ाते हैं, भुनी हुई मूँगफली वात बढ़ाती है। आम और पपीता पित्त बढ़ाते हैं। परन्तु इन सबका असर किसी भी व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्ति या दोषक गठन से बदल जाता है। ये अवधारणाएँ बहुत लोकप्रिय हैं रुग्णहितके लिये पहले इनका ध्यान रखना चाहिए। उपयुक्त आहार तय करने से पहले कसी भी व्यक्ति की दोष प्रकृति पहचानना लाभदायक होता है। आर्युर्वेद के अध्याय में आप दोषों के बारे में और पढ़ेंगे।

ठण्डा और गर्म

लोग मानते हैं कि खाने की कुछ चीज़ें गर्म (ऊष्ण) होती हैं और कुछ ठण्डे (शीत)। यह आर्युवेद की इस मजसे मेल खाता है कि खाने की अलग-अलग चीज़ों में शीतोष्ण असर होते हैं। इसका खाने की चीज़ के तपमान से कुछ लेनादेना नहीं होता परन्तु यह शरीर पर उनके असर से सम्बन्धित होता हे। इस लिए खाने की कुछ चीज़ें जिनमें जलन होती है, पसीना आता हे या प्यास लगती है ऊष्ण कहलाते हैं। दूसरों में इनसे उलटे असर होते हैं।

रस-स्वाद
Juice Taste

आयुर्वेद के अनुसार मधुर, कडवा, खट्टा, लवण,
कशाय और तिखा ऐसे छे रस है इस फोटो में शहद, मेथी,
इमली, मिर्ची आदी एकेक रस के रूप है

Red Chilli Powder

तिखे गुणधर्म से शरीर में कफ कम होता है,
पानी भरता है और जलन होती है इससे सर्दी जुकाम या
कफकारक बिमारियों में कुछ लाभ होता है

भोजन में छ प्रबल (रस) होते हैं जो प्रभावित हैं। ये छ: रस हैं- मधुर (मीठा), तीखा (काटु), कटू (चरपरा), अम्ल (खट्टा), लवण (नमक युक्त), कशाया (कसैला)। भोज्य पदार्थ जिनमें प्रबल मधुर रस होता है वो शरीर के लिए काफी उपयोगी और पोषक होते हैं (जैसे – अनाज, दालें, दूध और शहद)। फलों में भी मधुर व अम्ल रस होता हे और फल शरीर के लिए अच्छे होते हैं। लवण, कशाया और काटू रसों से और अधिक विशिष्ट असर होते हैं। ये रस एक हद तक शरीर के लिए ज़रूरी होते हैं। परन्तु बहुत अधिक मात्रा में लेने पर ये नुकसान पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए मिर्च से आँख, नाक, श्वसनी और पेट से स्राव बहने लगते हैं। इनसे कफ कम होता है। चरपरी चीज़ों जैसे मिर्च, चटनी और काली मिर्च से हम इसका अनुभव कर सकते हैं।

कशाया पदार्थ, कसैले होते हैं जैस कि आंवला और हर्र हर्र पाउडर को दॉंत साफ करने में इस्तेमाल करते हुए हम कसैला स्वाद महसूस कर सकते हैं। यह साथ जोड़ने, सुखाने और सख्त बनाने के लिए असरकारी है। लवण यानि नमक युक्त चीज़ों से पाचक रस स्रावित होते हैं इनसे खानेमें स्वाद बढता हे। लेकिन ज़्यादा नमक खाने से त्वचा और बाल सूखे हो जाते हैं, बाल झड़ने लगते हैं और बुढ़ापा जल्दी आता है। इससे रक्तचाप बढनेका भी धोखा है। अधिकांश पौधों की पत्तियॉं तीखी यानि कड़वी होती हैं और उनमें एलकालॉएड मूलतत्व होते हैं ये कम मात्रा में तो दवाई का काम करते हैं और ज़्यादा मात्रा में ज़हर का। इसीलिए मनुष्यों को इनका स्वाद पसन्द नहीं आता।

पाचकता
mung udddal

दालों में मुँगदाल शीतकर और उडददाल कुछ हद तक
वातकर मानी जाती है, उडद दाल में प्रथिन ज्यादा होते है

Meat

इससे खून की और पेशियों की वृद्धी जरूर होती है लेकिन
अति सेवन के कारण दिल की बिमारियॉं भी हो सकती है

कुछ चीज़ें मुश्किल से पचती हैं (गुरू) और कुछ आसानी से (लघु)। गोश्त, मटन चावल, दूध, काले चने सेसम बंगाली चने गुरू चीज़ें हैं। इन्हें कम या मध्यम मात्रा में लेना चाहिए। मूँग, लस्सी, बकरी का दूध, शहद, गन्ने का रस, तरबूज आदि लघु चीज़ें हैं। इनका सेवन खुलकर किया जा सकता हे। ये खासकर बच्चों, बीमार लोगों और बूढ़े लोगों के लिए यह समस बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उनका पाचन तंत्र बहुत मज़बूत नहीं होता।

सूखे या चिकने
Ghee
मख्खन से बना घी उर्जा देता है लेकिन
ज्यादा मात्रा में लेना धमनियों के लिए
इससे नुकसान होता है

खाने की कुछ चीज़ें, उनमें होने वाले तेल और नमी के कारण, मुलायम और चिकनाई वाली होती हैं। इन्हें स्निग्ध कहते है। और कुछ जिनमें तेल और नमी नहीं होती वो सूखी कहते है। सभी अनाज और दाले रूक्ष होती हैं इसलिए उनके साथ स्निग्ध चीज़ों जैसे घी या तेल, लहसून, प्याज़ सब्ज़ियों और ताजे फलों को लेना ज़रूरी होता है। रूक्ष पदार्थ पाखाने को कड़ा बनाते हैं और स्निग्ध पदार्थ इसे मुलायम करते हैं। यह बहुत आम अनुभव है कि चने के आटे (बेसन) से बनी चीज़ें बहुत ज़्यादा खाने से पाखाना कड़ा हो जाता है। सूखी चीज़ें वात दोष बढ़ाती हैं। मुलायम और चिकनाई प्रदान करने वाली चीज़ें कफ बढ़ाती हैं।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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