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दस्त का इलाज

डॉक्टर के सलाहसे जीवाणुरोधक दवाइयॉं लग सकती है|

तीन महत्वपूर्ण बिंदू

दस्त में बच्चे के इलाज के लिए तीन महत्वपूर्ण बिंदू ये हैं :

  • यह तय करना कि प्रति जीवाणु दवा दी जाए या नहीं।
  • निर्जलीकरण ठीक करना
  • उपयुक्त आहार देते रहना

किसी भी चिकित्सीय जांच से यह पक्की तरह से नहीं पता चल सकता कि दस्त वायरस के कारण हुआ है या बैक्टीरिया के कारण। दस्त के मामलों में से करीब आधे वायरस के संक्रमण से होते हैं और आधे बैक्टीरिया के। परन्तु कुछ महत्वपूर्ण संकेत होते हैं। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी दिखाई दें तो यह बैक्टीरिया से होने वाले दस्त के सूचक हैं।

  • मल में खून होना
  • बुखार
  • पेट में दर्द
  • टट्टी में से गंदी बदबू आना

बैक्टीरिया से होने वाले दस्त में कोट्रीमोक्साज़ोल नामक प्रतिजीवाणु दवा से फायदा होता है। याद रहे कि अगर खूब सारी पानी जैसी टट्टी आए जिसके साथ और कोई भी लक्षण न दिखाई दें तो यह आमतौर पर वायरस वाले दस्त होते हैं। ऐसे में कोई भी प्रतिजीवाणु दवाओं की ज़रूरत नहीं होती। इस तरह के दस्त 3 से 5 दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। धैर्य रख कर ध्यान रखते रहना और शरीर में पानी की कमी को पूरा करना महत्वपूर्ण है।

बच्चे को अतिसार होने पर शुष्कता हो या नहीं, लेकिन उसे द्रवपदार्थ मुँह द्वारे दे| यह आप स्वयं कर सकते है| द्रव पदार्थोंसे बच्चे में रोग-प्रतिकारक शक्ती आती है| अपने डॉक्टर या स्वास्थ्यसेवक को इसकी जानकारी अवश्य दे|
दस्त हो किन्तु शुष्कता ना हो या कम हो तो घरेलू इलाज कर सकते है| परंतु अतिशुष्कता हो तब घर में रुके बिना तुरंत अस्पताल पहुँचे|

निर्जलीकरण ठीक करना

बच्चों के दस्त में शरीर में पानी की कमी पूरी करना सबसे महत्वपूर्ण इलाज है। अगर निर्जलीकरण बहुत गंभीर न हो तो आप बच्चे को घर में बने घोल दे कर ही उसके शरीर में पानी की कमी की आपूर्ती कर सकते हैं। ये घोल ओ आर एस भी हो सकता है और चीनी या नमक का घोल भी।

मुँह से निर्जलीकरण के उपचार जिसे ओरल रिहाइड्रेशन थेरैपी (ओ आर टी) भी कहते हैं का प्रमुख नियम यह है कि जिस बच्चे को दस्त हो रहे हों उसे सामान्य से ज़्यादा तरल दिया जाना चाहिए।ओ आर टी के कई रूप होते हैं। ओ आर टी का मतलब है मुँह से तरल देना जिससे निर्जलीकरण रोका जा सके या उसे ठीक किया जा सके। तरल पदार्थ या तो घरों में मिलने वाले कोई भी पीने की चीज़ें हो सकते हैं या बाज़ार में पैकेटों में मिलने वाले ओरल रिहाईड्रेशन साल्ट (ओ आर एस) को पानी में मिला कर तैयार किया हुआ तरल पदार्थ। स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से ओ आर टी में इस्तेमाल हो सकने वाले विभिन्न तरलपपदार्थों की सूची नीचे दी गई है।

घर के तरल पदार्थ

निर्जलीकरण रोकने के लिए दस्त की शुरुआत में अतिरिक्त तरल पदार्थ देना ज़रूरी होता है। तरल पदार्थ और आहार दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। जब दस्त शुरु हों या चल रहे हों तो उस समय सामान्य से अधिक तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए और दूध भी पिलाते रहना चाहिए। अगर ये पदार्थ शुरु में और सही तरह से दिए जाएं तो दस्त के गंभीर मामलों में से केवल 10 प्रतिशत में स्वास्थ्य कार्यकर्ता की मदद की ज़रूरत पड़ेगी। तरल पदार्थ जिनमें नमक और या र्स्टाच या चीनी और प्रोटीन हो वो अच्छे रहते हैं। ऐसे पदार्थ शरीर में द्रव और लवणों दोनों की कमी पूरी करते हैं। इनके अच्छे उदाहरण हैं सूप जिनमें नमक पड़ा हो, नमकीन चावल का पानी, नमकीन मठा या मक्की का सूप आदि।इसके अलावा बच्चों को खूब सारे ऐसे तरल पदार्थ भी दिए जाने चाहिए जिनमें नमक न हो जैसे पीने का सादा पानी, नारियल का पानी, चाय, फलों का ताज़ा रस जिसमें चीनी न मिली हो। ऐसे तरल पदार्थ न दें जिनमें चीनी हो जैसे कॉफी या कोल्ड डिंक्स।अगर बच्चा स्तनपान पर हो तो ज़रूरी है कि स्तनपान जारी रखा जाए।

ओ आर एस घोल

ओ आर एस घोल दिए जाने की सिफारिश निर्जलीकरण के उपचार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की गई है। जहॉं भी सम्भव हो वहॉं घर में निर्जलीकरण से बचाव के लिए यह दिया जाना चाहिए। ओ आर एस के पैकेट में ग्लूकोस और नमक होता है। और जब इसे पानी में घोला जाता है तो यह निर्जलीकरण रोकने या उसके उपचार के लिए बेहद उपयोगी रहता है।

ज़्यादातर ओ आर एस पैकेटों को एक लिटर पानी में घोला जाना होता है। जिन पैकेटों में ट्राईसोडियम सिट्रेट की जगह सोडियम बाइकार्बोनेट होता है (2.5 ग्राम) वो भी ठीक रहते हैं। परन्तु इन्हें ज़्यादा समय तक रख पाना संभव नहीं होता। बाज़ार में मिलने वाले बहुत से पैकेटों में लवणों का अनुपात उतना नहीं होता जितना की मान्य है। किन्हीं में बहुत अधिक चीनी होती है। किन्हीं अन्य में बहुत कम नमक होता है। स्वास्थ कार्यकर्ता को सिर्फ उन्हीं पैकेटों का इस्तेमाल करना चाहिए जिनमें ऊपर दिए गई मात्राओं में सभी चीज़ें मौजूद हों।

चीनी और नमक का घोल

ओ आर एस की जगह घर में चीनी और नमक का घोल बना कर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह घोल 5 ग्राम नमक (5 मिली लीटर का एक चम्मच) और 20 ग्राम चीनी (5 मिली लीटर के चार चम्मच) एक लिटर पानी में डाल कर बनाया जाता है।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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