गॅस अक्सर एक हसी मजाक का विषय बन जाता है| इसलिये इस विषय को जादातर लोग टालते है| गॅस का मतलब है मुँह से या गुद से हवा का निकलना| सही रहन-सहन से यह समस्या कम हो सकती है| बढते उम्र के साथ वायूविकार ही बढता है| किसी भी पाचन क्रिया में थोडासा वायू होता ही है| लेकिन पाचन क्रिया बिगडनेसे जादा वायू निकलता है| कुछ अन्न पदार्थ भी जादा वायूकारक होते है|

डकार आना

जठर में पाचन निर्मित या खाने के साथ निगला हुआ वायू डकार के माध्यम से निकलता है| अपच्य से जादा ही वायू निकलता है| कुछ लोगोंको अल्पसा वायूभी आवाज के साथ डकारनेकी आदत होती है| आजकल ऐसे लोगोंकी थोडीसी मुश्किल होती है| लंबी डकार लाने में कुछ भी बडप्पन नहीं उलटा मजाक होता है यह सोचना चाहिये|

डकार कम करने के लिये अपना आहार सादा रखे और शांती से चबाकर खाये| अपनी भूख से थोडा कम खाने से पचन ठीक होता है| खाने का समय भी नियत होता चाहिये| जरूरत हो तो भोजन के अंत में आधा चम्मच लवणभास्कर या हिंग्वाष्टक चूर्ण लेना ठीक होगा|

पानी पिते समय एकदम न पीकर घुँट घुँट पीना चाहिये| इससे हवा निगलना टलता है| डकार देने की इच्छा रोके| यह वायू सामान्यत: आँत में चला जाता है|

गुद से निकला वायू

आँत में तैय्यार होनेवाला वायू सामान्यत: गुद से बाहर चला जाता है| वायू जादा हो तो आवाज के साथ चलता है| कुछ पदार्थ पाचन में जादा वायूकारक होते है| इसमें आलू, उडद, चना, बेसन, चावल, दूध, पनीर, मिठाई आदि प्रमुख है| वायू जादा हो तो सामान्यत: दुर्गंध होता नहीं|

पाचन तंत्र में स्थानिक किटाणू होते है| कभी कभी ये किटाणू जाती बदलकर अन्य प्रकार के जिवाणू बच जाते है| पाचन तंत्र स्थित एन्झाईम के साथ संयोगसे ऐसे समय जादा वायू निकलता है| अँटिबायोटिक दवाओंसे भी ऐसा हो सकता है| इसके विपरित दहीसे अच्छे जिवाणू स्थापित हो जाते है|

दुर्गंधयुक्त वायू का मुख्य कारण है गुदा में मल का रुके रहना याने कब्ज| अंडी, दूध, मिठाई, मछली या सामिष आहार से कई लोगोंको बदबूकारक वायू का अनुभव होता है| ऐसे व्यक्ती इन आहार तत्वोंको टाले|

प्रतिबंध
  • हर एक व्यक्ती खुद को अनुरुप आहार चुने|
  • भोजन करते समय शांती से चबाकर खाना खाये|
  • हवा निगलना जितना हो सके टालना चाहिये|
  • हप्ते में एक दिन या आधा दिन भोजन टालने से आत में वायू कम पैदा होता है| इसका प्रयोग भी अवश्य करे|
  • कुछ यौगिक उपाय पाचनतंत्र को साफ सुथरा रखते है| इसमें अग्नीसार, उड्डियान और नौली महत्त्वपूर्ण है| लेकिन कम उम्र में ही ये सिखे|
  • हर माह एक दिन सौम्य विरेचक ले ले|
  • एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच त्रिफला चूरण मिलाकर पिने से चार पॉंच घंटे में पेट साफ होता है|
  • अपना पेट बढने ना दे, पतलाही रखे| स्वास्थ्य के लिये यह अनमोल है|
  • पानी और भोजन साफ सुथरा होने से संक्रमण कम होता है| इससे जादातर वायू विकार से हम बच सकते है|
  • पाचन के लिये जादा तले हुए या घी वाले पदार्थ न खाये| भोजन हलका और सादा होना चाहिये|
विशेष सुझाव

वायूविकार असल में पाचन तंत्र की बिगडने की सूचना है| अपना भोजन और रहन सहन में सुधार लाकर इसको हम ठीक कर सकते है| कभी कभार पेट में जादा वायू होने से छाती और पेट में दर्द होता है| यह दर्द शरीर के स्थिती को बदलनेसे जगह बदलता है|क्योंकी किसी भी हालत में वायू उपर का स्थान ढूंढता है इसलिये बैठकर, उठकर या लेटकर हम इस तथ्य को समझा सकते है| यौगिक पवनमुक्तासन इसके लिये उपयुक्त है|

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

message-icon shyamashtekar@yahoo.com     ashtekar.shyam@gmail.com     bharatswasthya@gmail.com

© 2009 Bharat Swasthya | All Rights Reserved.