स्थाई गर्भ–निरोधक उपाय

पुरुष और महिला गर्भ प्रतिबंध के बहुत से उपाय मौजूद हैं। स्थाई गर्भ प्रतिबंध नसबंदी के द्वारा किया जाता है। यानि पुरुषों में शुक्राणुओं और महिलाओं में अंडे का रास्ता रोक कर।

पुरुष नसबंदी
male nasbandi
पुरुषों में नसबंदी बहुत आसान और
सुरक्षित है, इससे कोई भी हानी नहीं होती

पुरुषों में स्थाई गर्भनिरोधक का सबसे महत्वपूर्ण विधी आपरेशन वाला तरीका है ‘नसबंदी’। नसबंदी का आपरेशन करना तुलनात्मक रूप से आसान होता है। अंडकोश की थैली की त्वचा में से वाहिका को ढूंढ कर स्थानीय शून्यता देकर एक छेद लगा दिया जाता है। नस को खून की नलियों और तंत्रिकाओं से अलग करके काटकर डॉक्टर दोनों ओर बांध देता है। सिला हुआ ज़खम ठीक हो जाता है और उसका कोई निशान भी नहीं रहता। बाद में कटे हुए सिरे वृषणकोष में छोटी छोटी गांठों जैसे महसूस किए जा सकते हैं।

अभी इसका बिगर टांका ऑपरेशनभी किया जाता है। इसमें छेद होता है लेकिन सुईसे। इसी छोटे छेदसे नस निकालकर बांधी जाती है। इसमें खून निकलनेका लगभग कोई मौका नहीः टॉंका भी नही लगता। पहिलेसे यह तरीका कम समय लेता है और आसान भी है।

सावधानी

नसबंदी के तीन महीनों बाद तक भी वीर्य में शुक्राणु आते रहते हैं। ये वो शुक्राणु होते हैं जो नसबंदी के पहले से ही शुक्र थैली में थे। इसलिए नसबंदी के बाद भी गर्भ निरोध के लिए तीन महीने तक निरोध या कोई और तरीका इस्तेमाल करते रहने की सलाह दें। कभी कभी शल्यचिकित्सक द्वारा वाहिका को ठीक से न ढूंढ पाने या ढंग से बंद न कर पाने के कारण नसबंदी असफल हो जाती है। परन्तु आमतौर पर इस नसबंदी के असफल होने की संभावना काफी कम होती है।

नसबंदी के बाद वीर्य जैसा द्रव पहले जैसे ही आता रहता है। बस इसमें शुक्राणु नहीं होते। नसबंदी के बाद शुक्राणु शुक्र थैलियों तक नहीं पहुँच पाते। लिंग का खड़ा होना और वीर्य निकलना सब सामान्य तरह से होता है। यौन क्षमता में भी कोई कमी नहीं आती क्योंकि टैस्टोस्टेरोन हारमोन का बनना जारी रहता है। याद रखें कि हारमोन खून में सीधे पहुँचते हैं किन्हीं भी नलियों या वाहिकाओं के माध्यम से नहीं। इसलिए नसबंदी से हिचकने का कोई कारण नहीं है।

हमारे देश में ज़्यादातर समाजों में पुरुष नसबंदी से बचते रहते हैं। पर इसके कारण चिकित्सीय नहीं बल्कि सामाजिक हैं। पिता बनना ‘पुरुषत्व’ की निशानी माना जाता है। इसलिए पुरुष प्रजनन की अपनी क्षमता बरकरार रखना चाहते हैं। यह डर भी होता है कि कोई अविश्वसनीय पत्नी किसी और के साथ गर्भवती हो जाए तो ऐसे में परिवार की बदनामी होगी। कभी कभी यौन दम्पत्तियों को नपुंसकता या कमज़ोरी आ जाने का डर भी होता है। ये डर एकदम गलत हैं। इन सब कारणों से यह बहुत अच्छा तरीका खुलकर इस्तेमाल ही नहीं हो पाता।

  • पुरुष नसबंदी- अब पुरुष नसबंदीमें बिना टाका तरीके प्रचलित है| इसको केवल पॉंच मिनिट लगते है, ना दर्द होता है न कोई टाका| नसबंदी के बाद तुरंत घर जा सकते है लेकिन अगले तीन महिने निरोध का प्रयोग करने जरुरी है| नसबंदीसे यौन क्रिया का क्षमता या ताकद घटनेका कोई भी कारण नही| असलमें गर्भधारणा का डर ना होने से यौनक्रियामें जादा उत्साह और आनंद होता है|/li>
  • आज-कल वाहिका को बंद करने के नए तरीके जिनमें चाकू की ज़रूरत नहीं होती, प्रयोग में आए है। इनमें शुक्राणु वाहिका में एक पदार्थ डाल दिया जाता है जिससे वो बंद हो जाती है।
स्त्री नलिकाबंदी
female nasbandi
स्त्री नसबंदी गर्भनिरोध का सबसे आम तरीका है

भारत में आज डिंबवाही नलिका को बंद कर देने का तरीका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पताल इसके सबसे ज़्यादा ऑपरेशन करते हैं। नलिकाबंदी के दो तरीके होते हैं –

  • छोटा – अंतरूदरर्शन जिसमें पेट पर छोटा सा चीरा लगाया जाता है और हाथ से ऑपरेशन किया जाता है।
  • लॅपरोस्कोपी याने दुर्बीनसे जिसमें एक प्रकाशकीय दुर्बीन को पेट के अंदर डाला जाता है और इसके जरिए नलियों पर कसे हुए प्लास्टिक के छर्रे चढ़ा दिए जाते हैं।

पहले तरीके में एक हफ्ते अस्पताल में रहने की ज़रूरत होती है। बच्चे के जन्म के एकदम बाद इसे करना उपयोगी होता है क्योंकी तब तक गर्भाशय भी बड़ा होता है और उस तक पहुँचना आसान होता है। परन्तु दूसरा आपरेशन तभी किया जा सकता है जबकि गर्भाशय अपने सामान्य आकार में पहुँच गया हो (यानि बच्चे के जन्म के छ: हफ्तों बाद)।

असफल नलिका बन्दी

कभी-कभी नलिका बन्दी भी असफल हो जाती है। कभी-कभी पुरानी किसी संक्रमण के कारण डिम्बवाही नली ढूँढ पाना मुश्किल होता है। कभी-कभी गलती से किसी और संरचना को डिम्बवाही नली समझ लिया जाता है। ऐसा बहुत ही कम होता है। परन्तु एक अनुभवी शल्य चिकित्सक द्वारा किया गया नलिका बन्दी का ऑपरेशन ज्यादातर सफल ही होता है। नलिका बन्दी में जटिलताएँ आमतौर पर नहीं होतीं। कभी-कभी अन्दरूनी रक्तस्राव होता है, संक्रमण और श्रोणी प्रदाहक रोग हो जाती है। बाद में अगर नली को फिर से खोला जाए तो नली में अस्थानिक गर्भ हो सकता है। इसके अलावा एक लम्बे समय में होने वाली तकलीफ जिसे नलिका बन्दी के बाद होने वाला संलक्षण कहते हैं। इसमें महिला को पेट के निचले हिस्से व पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है, माहवारी में बहुत अधिक बहाव होता है और तनाव के लक्षण जैसे सिर में दर्द, दिखाई देने में मुश्किल और श्रोणी के रक्त संचरण में गड़बड़ी हो जाती है। ये सभी गम्भीर लक्षण हैं और इनमें से कुछ से मौत भी हो सकती है। इसके मुकाबले पुरुषों की नसबन्दी कहीं ज्यादा सुरक्षित है। इसके बावजूद नसबन्दी के मुकाबले नलिका बन्दी ज्यादा होती है।

नसबंदी- नलिकाबंदी फिर से खोलना

नसबंदी और परिवार नियोजन के स्थाई तरीके हैं। परन्तु किन्हीं असामान्य परिस्थितियों में, जैसे कि सभी बच्चों की मौत हो जाने पर कभी-कभी इसे फिर से खोलना ज़रूरी हो जाता है। यह कटे हुए सिरों को फिर से जोड़कर किया जाता है। पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही चार में से एक ऐसा आपरेशन सफल होता है। ऐसी स्थिति में बच्चा गोद लेना, जहाँ भी यह सम्भव हो, एक बेहतर विकल्प है।

परिवार नियोजन के लिये विशेष सुझाव
marriage girls
नाबालिग लडकियों की शादी एक अपराध है
  • पुरुष नसबंदी सर्वाधिक सुरक्षित और आसान है| इससे यौन संबंध जादा चिंतामुक्त होता है|
  • शादी के बाद दो वर्ष तक संतती न होना अच्छा है| उसी प्रकार दो बच्चोंके बीचमें पॉंच वर्ष का अवधी होना चाहिये|
  • लेकिन शादी समय महिला की उम्र पच्चीस से उपर हो तब बच्चा जल्दी होना हितकर है|
  • यौन संक्रमक रोगोंसे बचने के लिये निरोध यही एक साधन है| अन्य संततीप्रतिबंधक साधनोंसे यह सुरक्षा नही मिलती|

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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