सरदर्द लघु लेख

sardard हर किसीको सरदर्दका अनुभव अवश्य होता है। लेकिन सरदर्द के अलग अलग कारण और प्रकार है| संभवत: सरदर्द का मुख्य कारण सीर की धमनियॉं और मांस पेशीमें तनाव पैदा होना| इसको हम सामान्य सरदर्द कहेंगे| लेकिन कभी कभी सरदर्द मस्तिष्ककी बिमारी के कारण भी होता है| या कभी और संस्थानोंके कारण भी सरदर्द हो सकता है| सामान्य सरदर्दका इलाज भी आसान है| सरदर्दकी लगभग ९०% घटनाओंमें सरदर्द सामान्य होता है| इसके लिये दर्दनिवारक गोली काफी है| अब हम सरदर्द के प्रकार और कारण जान लेंगे|

निदान – सामान्य सरदर्द

मस्तिष्क या शरीर के अन्य संस्थानोंमें सरदर्द का कारण ना हो तो सरदर्द सामान्य समझना चाहिये| इसके भी तीन प्रकार है| तनाव सरदर्द -यह सरदर्द मानसिक तनाव से, अतिश्रम, निराशा, गरमी या मौसम के बदलाव से होता है| सिर के मांस पेशीयोंमें तनाव होना यही इसमें मुख्य बिंदू है|

अधसिसी का सरदर्द बार बार निकलता है| अक्सर यह किशोरावस्था में शुरू होता है| आम तौरपर यह सरदर्द सिर के एकही तरफ होता है| अक्सर इसके पहले उल्टियॉं होती है| आवर्ती सरदर्द- यह प्रकार बार बार उभरनेवाला सरदर्द का है| संभवत: १-२ घंटेके बाद सरदर्द चला जाता है| लेकिन कुछ दिनोंके बाद सरदर्द वापस लौटता है|

अन्य संस्थानोंसे संबंधित सरदर्द

बुखारवाले बिमारियोंमें सरदर्द होना आम बात है, जैसे की फ्ल्यू, मलेरिया, डेंग्यू, टायफाईड आदि| मस्तिष्कमें संक्रमण, गांठ या सूजनसे भी सरदर्द होता है| दृष्टीदोष, कम या जादा रक्तचाप, रक्तशर्करा कम होना अम्लता, माहवारीपूर्व तनाव, सायनस सूजन, हवा का दबाव कम या जादा होना, उष्माघात आदि कारणोंसेभी सरदर्द होता है| कुछ दवाओंके दुष्प्रभावसे सरदर्द होता है| शराब भी सरदर्द का एक कारण हो सकता है|

इलाज

पहले सरदर्द का कारण जानना जरुरी है| सामान्य सरदर्द के लिये पॅरासिटामॉल या अन्य दर्दशामक गोली पर्याप्त होती है| आयुर्वेद के अनुसार त्रिभुवनकिर्ती उपयोगी है| होमिओपथीमें सरदर्द के लिये सही दवा चयन आवश्यक है| एक बार सुनिश्चित की हुई दवा समय समय पर प्रयोग कर सकते है| मर्मबिंदू दबाव याने ऍक्युप्रेशर का भी प्रयोग उपयोगी है| शिरोभाग में मुख्य बिंदू याने ब्रह्मबिंदू पर अपनी उंगलीसे एक मिनिटतक दबाए| इसके साथ रोगी को लंबी सांस लेकर शांतिसे छोडेनेको कहिये| इस प्रयोगसे धीरे धीरे सरदर्द कम होता है|

कभी कभी सरदर्द केवल विश्राम, शिथिलीकरण या अच्छी नींदसे ठीक होता है| सरदर्द जादा या हमेशा होता हो तब डॉक्टरसे जॉंच करनी चाहिये| सरदर्द अन्य शरीर संस्थानोंके कारण होनेकी आशंका पर डॉक्टरसे मिलना चाहिये| सरदर्द के लिये रक्तचाप नापना आवश्यक है| कभी कभी अन्य टेस्ट भी जरुरी हो सकते है जैसे की खून की जॉंच, सीटी स्कॅन या एम.आर.आय.

योगशास्त्र का प्रयोग

यौगिक शुद्धिक्रिया जैसे जलनेती, प्राणायाम, वमन आदिसे चिरकालीन सरदर्द ठीक हो सकते है| शवासन शिथिलीकरणके लिये महत्त्वपूर्ण है| इसके सही तकनिक योग शिक्षक के द्वारा सीखना चाहिये| या सिर को मालिश करने से रक्तपरिसंचरण बढकर तनाव सरदर्द ठीक होता है| अपचन के कारण होनेवाला सरदर्द उल्टी होनेपर ठीक हो जाता है|

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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