addiction व्यसन (लत)
तम्बाकू

Tobaccoस्वास्थ्य पर तम्बाकू के बहुत सारे बुरे असर होते हैं। तम्बाकू शायद विश्व में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली लत लगाने वाली चीज़ है। इसे मुँह से निगला जाता है, चबाया जाता है, नाक से सूंघा जाता है और धूम्रपान के ज़रिए लिया जाता है। यह ऑफिसों, खेतों, फैक्टरियों और घरों सभी जगहों पर एक जितनी आम है। धूम्रपान से वे लोग भी प्रभावित होते हैं जो खुद चाहे धूम्रपान न भी कर रहे हों। उन्हें धूएं में सांस लेनी पड़ती है। इस तथ्य के आधारपर सार्वजनिक स्थानपर धूम्रपान पर पाबंदी है।

तम्बाकू से स्वास्थ्य पर होने वाले असर

तम्बाकू में निकोटिन होता है। इससे फेफड़ों, दिल, आमाशय, मुँह और खून की नलिकाओं को नुकसान होता है। इसके सिर्फ कुछ एक मनोवैज्ञानिक उत्तेजना होती हैं।

  • शरीर में जहॉं जहॉं यह तम्बाकू संपर्क में आती है उन जगहों पर इससे कैंसर हो जाता है जैसे कि होठों, मुँह और फेफड़ों में।
  • इससे आमाशय में ऐसिड बढ़ जाता है जिससे आमाशय शोथ हो जाता है। यह आमाशय शोथ आसानी से ठीक भी नहीं हो पाता। इससे आमाशय में अल्सर भी हो जाते हैं।
  • धूम्रपान और फेफड़ों के कैंसर का करीबी रिश्ता है।
  • गर्भावस्था में धूम्रपान से नाड़ में खून का बहाव कम हो जाता है, इससे भ्रूण कमज़ोर हो जाता है और उसका वजन कम हो जाता है।
  • अगर दिल पर असर हो तो इससे खून का बहाव प्रभावित होता है, धमनियॉं सख्त हो जाती हैं और दिल का दौरा पड़ जाता है। इससे खून का दबाव बढ़ जाता है और दिल की बीमारियॉं होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • लगातार धूम्रपान करने से फेफड़ों में स्थाई बदलाव आ जाते हैं, श्वसनिका शोथ हो जाता है, कफ़ हो जाता है और वायु के मार्गों में रूकावट आ जाती है।
  • हमेशा धूम्रपान करने वालों की नज़र भी कमज़ोर हो जाती है।
  • श्वसनिका शोथ, उच्च रक्त चाप, दिल की बीमारियों, पेपसिनी अल्सर या आमाशय में अम्लता और मधुमेह के रोगियों के लिए धूम्रपान खासतौर पर बहुत बुरा है।
  • धूम्रपान के कारण मुँह से बदबू आती है।
तम्बाकू के खेतों में काम कर रहे मजदूर

तम्बाकू की धूल में सांस लेने के कारण ये मजदूर निकोटिन के बहुत से असर झेलते हैं। इन्हें फेफड़ों का तपेदिक हो जाता है जिससे फेफड़ों में चिरकारी शोथ हो जाता है।

निकोटिन की गंभीर विषाक्तता से मौत भी हो सकती है। इससे आमाशय और छाती में जलन, थूक आने, पसीना आने, दस्त होने, मितली, उल्टी, जी मिचलाने, बेहोशी, सुन्न होने, पेशियों के कमज़ोर होने, कंपकपी होने की शिकायत और अंतत: मौत हो जाने का खतरा हो जाता है। आँखों का तारा पहले सिकुड़ता है और फिर फैल जाता है। धड़कन धीमी फिर तेज़ और फिर अनियमित हो जाती है। धीरे धीरे श्वसन के मंद पड़ जाने से मौत हो जाती है।

तम्बाकू : अर्थव्यवस्था और राजनीति

तम्बाकू से मेहनत से कमाया हुआ पैसा नाली में चला जाता है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही तम्बाकू पर पैसा खर्च करते हैं। सामाजिक रूप से स्वीकार्य होने और शराब की तुलना में कम नुकसानदेह प्रतीत होने के कारण इसका प्रचलन काफी ज़्यादा है और बच्चों में भी इसकी आदत बहुत आसानी से पड़ जाती है।

तम्बाकू खासकर जब धूम्रपान के ज़रिए ली जाती है तो यह शराब से भी ज़्यादा नुकसानदेह होती है। परन्तु अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू व्यापार के सामने दुनिया की सरकार काफी कमज़ोर रहती हैं। सरकार सिगरेट पीने को प्रतिबंधित नहीं कर सकतीं; वे केवल छोटे छोटे अक्षरों में इनके पैकेटों पर चेतावनी लिख पाती हैं।

धूम्रपान भी बड़प्पन का एक मानक बन गया है और इसलिए सिगरेट का व्यापार बढ़ता जा रहा है। बड़ी तादाद में किशोर और युवा वर्ग भी धूम्रपान अपना रहे हैं। विज्ञापनों का भी धूम्रपान को बढ़ावा देने में खासा योगदान रहा है। हाल ही में भारत में सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों में धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाया गया है।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

message-icon shyamashtekar@yahoo.com     ashtekar.shyam@gmail.com     bharatswasthya@gmail.com

© 2009 Bharat Swasthya | All Rights Reserved.