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  इस प्रोजेक्ट के लिए सर रतन टाटा ट्रस्टने सहाय्यता की है
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bullet गर्भावस्था में देखभाल
गर्भावस्था के दौरान ठीक से देखभाल माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण है। तकनीकी रूप से गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली देखभाल को प्रसव पूर्व देखभाल कहते हैं। इसके तीन उद्देश्य होते हैं।
arrow माँ की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना। इस अवस्था में कुछ बीमारियाँ होने की सम्भावना होती है। जैसे कि खून की कमी यानी अनीमिया। और अगर कुछ बीमारियाँ जैसे तपेदिक या दिल के रोग पहले से हों तो इनके और बिगड़ जाने की सम्भावना होती है। इन सब समस्याओं के लिए उचित देखभाल ज़रूरी है। सुरक्षित प्रसव के लिए भी अच्छी प्रसव पूर्व देखभाल ज़रूरी है। pregnancy care
गर्भावस्था में पेट की जॉंच करना बिलकुल अनिवार्य है
arrow माँ को सुरक्षित प्रसव और शिशु की देखभाल के बारे में जानकारी देना।
arrow बच्चा सामान्य और स्वस्थ हो यह सुनिश्चित करना। प्रसव पूर्व देखभाल में होने वाली हर जाँच के दौरान तीन महत्वपूर्ण सवालों पर ज़रूर ध्यान दिया जाना चाहिए -
arrow क्या माँ सामान्य और स्वस्थ है या उसे कोई बीमारी है?
arrow क्या भ्रूण ठीक से बढ़ रहा है?
arrow क्या प्रसव सुरक्षित व सामान्य होगा?
arrow हर तीन महीनों में कम से कम एक बार परीक्षण होना ज़रूरी है। सबसे अच्छा हो अगर प्रसव पूर्व देखभाल निम्नलिखित समय-सूची के अनुसार किया जाए।
arrow प्रसव पूर्व देखभाल (१० बार)  
arrow पहले से तीसरे महीनों में एक बार (१ बार)  
arrow चौथे से छठे महीनों में हर महीने (३ बार)  
arrow सातवें से नौवें महीने में हर पन्द्रह दिनों में (६ बार)  

हालाँकि सब गर्भवती महिलाएँ इस समय-सूची का पालन नहीं करतीं। कम से कम उन महिलाओं को इसका पालन ज़रूर करना चाहिए जिन्हें किसी तरह की कोई तकलीफ हो। नीचे दी गई जानकारी महत्वपूर्ण है -
arrow माता की उम्र
arrow कोई बीमारी या तकलीफ।
arrow कौन-सी गर्भावस्था है - पहली, दूसरी, तीसरी आदि।
arrow पिछले प्रसव और इस गर्भावस्था के बीच का समय (या सबसे छोटे बच्चे की उम्र पूछें।)
arrow पिछले प्रसवों में कोई समस्या या विशेष सहायता, क्या पिछला प्रसव सामान्य था? यह जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ समस्याओं के हर बार होने का खतरा होता है।
arrow बच्चों की संख्या और उनकी उम्र के बीच का अन्तर?
arrow पहले कोई गर्भपात हुआ है? पहले कभी मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ?
arrow क्या कोई बच्चा कालपूर्व हुआ है?
arrow पिछली माहवारी कब हुई थी?
arrow कोई महत्वपूर्ण बीमारी जैसे _ तपेदिक, डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, हैपेटाईटिस (यकृतशोथ) या दमा।
arrow महिला को इस गर्भावस्था और प्रसव के सन्दर्भ में कुछ महत्त्वपूर्ण लगता है।
arrow वो प्रसव कहाँ करवाना चाहती है - घर में या प्रसूति केन्द्र में।

प्रसव पूर्व देखभाल में भी गर्भवती महिला से निम्नलिखित जानकारी लेना चाहिए।
arrow यह कौन सी गर्भहै? पहिली, दूसरी, तिसरी आदि।  
arrow अगर यह पहला गर्भ नही है, तो इससे पहले हुए हर गर्भ की यह जानकारी ले।  
arrow गर्भ किस वर्ष ठहरा pregnancy
श्रोणी में भ्रूण का सिर घुस न पाना  प्रसव में मुश्किल पैदा करता है
arrow उसका परिणाम - गर्भपात, जीवित जन्म मृत जन्म
arrow प्रसव समय पर हुआ या समय से पहले
arrow गर्भपात के अलावा हर गर्भ में लडका हुआ या लडकी?
arrow जचकी सामान्य था या नही (उल्टा बच्चा / ऑपरेशन से हुआ इत्यादी)
arrow बच्चे अभी जीवित है या नही, अगर नही तो किस उम्र में मौत हुई?
arrow जचकी के समय मॉं को कोई तकलीफ हुई? (झटका, अधिक खून बहना, बच्चा अटकना, इत्यादि)
arrow गर्भावस्था में जॉंच हुई की नहीं, टेटनस के टीके लगे तो कितने
arrow जचकी किसने कराई? दाई / नर्स / डॉक्टर
arrow बच्चे का जन्म वजन सामान्य / कमजोर
arrow कोई गंभीर समस्या हुर्स हो, तो नोट करें जैसे
arrow मॉं को झटका आया
arrow बडे ऑपरेशन से बच्चा निकाला गया - क्यो?
arrow आडा या उल्टा बच्चा
arrow जुडवे बच्चे  
arrow फूल अटकना  
arrow बहुत ज्यादा खून जाना  
arrow मृत जन्म या नवजात शिशु की मृत्यू  
arrow समय से पहले जन्म  
arrow वर्तमान गर्भ में इन बिन्दुओं पर ध्यान दे  
arrow महिला की उम्र  
arrow महिला की उँचाई  
arrow महिला का वजन अगर ३५ किलो से कम है जो गंभीर कुपोषण का संकेत है| इस महिला को विशेष ध्यान दे|
arrow ५ से अधिक गर्भ  
arrow मॉं को कोई गंभीर बिमारी जैसे (दिल की बिमारी, तपैदिक (टी.बी.), शक्कर की बीमारी (डायबिटीज), सिकल बिमारी इत्यादि
arrow अधिक खून की कमी  
arrow गर्भावस्था के दौरान इन बिंदुओं पर भी ध्यान दे  
arrow बच्चे की बाढ कम(गर्भकाल के तुलना में बच्चादानी छोटा है, या मॉं का वजन बढ नही रहा है)
arrow जुडवा / उल्टा बच्चा  
arrow बच्चेदानी में बहुत ज्यादा पानी  
arrow गर्भावस्था में खून बहना  
arrow पुरे शरीर में सूजन  
arrow पीलिया  
arrow पेशाब में संक्रमण  

bullet सामान्य जाँच
पोषण से सम्बन्धित बीमारियों का पता करें। जैसे एनीमिया, रतौन्धी या मुँह में छाले । माँ की लम्बाई नापें। अगर उसकी लम्बाई १४५ सेन्टीमीटर से कम है तो उसकी श्रोणी का निचला सिरा बहुत छोटा होता है। ऐसे में बच्चे का सिर इसमें से आसानी से नहीं निकल पाता और इससे बच्चे का जन्म मुश्किल हो जाता है।

गर्भावस्था में नियमित रूप से माता का भार की जाँच करें। पता करें कि भार में यह बढ़ोत्तरी सामान्य है या नहीं। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान महिला का भार ९ से १० किलो बढ़ता है। इसमें से कुछ भार बच्चे के कारण और बच्चादानी और नाल की वृध्दि के कारण होता है। भार में कुछ वृध्दि माँ के शरीर में कुछ नमक और पानी के थम जाने के कारण होती है। अगर भार में बढ़ोत्तरी कम या ज्यादा हो तो तुरन्त डॉक्टर को बताया जाना चाहिए। अगर भार में वृध्दि कम है तो इसका अर्थ है कि माँ को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है। और बच्चे की वृध्दि भी ठीक नहीं हो रही है। हर बार जब माँ जाँच के लिए आए तो उसका रक्तचाप ज़रूर मापें। गर्भावस्था की विषाक्तता (पी.आई.एच) और कुछ और बीमारियों जैसे गुर्दे की संक्रमण में रक्तचाप बढ़ जाता है। ध्यान दें कि कहीं गर्भवती महिला के पैरों में सूजन तो नहीं है। यह गंभीर खून की कमी या गर्भावस्था की विषाक्तता के कारण हो सकता है। ऐसे में पूछें कि क्या महिला को साँस फूलने व दिल की धड़कन बढ़ने की शिकायत है।

bullet सोनोग्राफी जॉंच
sonography
सोनोग्राफी से गर्भ की जॉंच
आजकल सोनोग्राफी जॉंच बहुत ही आम बोलबाला है। सुविधा हो तो गर्भावस्था में २-३ बार सोनोग्राफी हो जाती है। इससे हमे कई तथ्य मालूम होते है, जैसे प्रसव की अपेक्षित तारीख, गार्भस्य भ्रूण की सेहत, अंगोंके बारे में गर्भ कोश में पर्याप्त पानी का होना आदि। पहली जॉंच अक्सर ८-१२ सप्ताह के बीच की जाती है।

अन्यथा सोनोग्राफी जॉंच चिकित्साविश्व में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जिससे रोगनिदान में क्रांति सी हुयी है। गर्भावस्था में इसके कई उपयोग है। माता और बच्चे के सेहत की काफी कुछ जानकारी समय समय मिलने में इसका बडा योगदान है। पहला अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट १० वें से १२ वें हफ्ते में किया जाता है। उसके बाद अगर ज़रूरी हो तो इसे फिर से भी किया जा सकता है। अल्ट्रासोनोग्राफी सुरक्षित होता है क्योंकि इसमें गर्भ की फोटो लेने के लिए ध्वनि की तरंगों का इस्तेमाल होता है, एक्स-रे का नहीं।
bullet अल्ट्रा साउण्ड टेस्ट/सोनोग्राफी
गर्भावस्था में अल्ट्रासोनोग्राफी या साधारण सोनोग्राफी टेस्ट आजकल ज्यादातर शहरों में अधिकतर किए जाने लगे हैं। अल्ट्रासोनोग्राफी में गर्भावस्था के बारे में काफी कुछ पता चल जाता है।
arrow बच्चे की उम्र और वृध्दि।
arrow बच्चा एक ही है या जुड़वाँ हैं।
arrow बच्चे का दिल या गुर्दों में कोई खराबी तो नहीं है।
arrow गर्भ में बच्चे और नाल की स्थिति।
arrow बच्चादानी का मुँह कसी हुई है या ढीली।
arrow पानी की थैली में द्रव की मात्रा।
यह एक बहुत-ही महत्वपूर्ण टेस्ट है। दुर्भाग्य से लोग व डॉक्टर इसका गलत इस्तेमाल यह पता करने के लिए भी करते हैं कि गर्भस्थ शिशु लड़का है या लड़की। यह दुर्भाग्यपूर्ण है की भारतमें सोनोग्राफीका कुछ गैरजिम्मेदार डॉक्टर भ्रूण की लिंग जानने के लिये इस्तेमाल करते है। यह बिलकुल गैरकानुनी है और दंडनीय है। पुरुष-सत्ताक सामाजिक परिस्थितीवश अनेक परिवार इसमें शामील होते है और बहुओंपर यह जुल्म करते है। लिंग- अनुपात इस सामाजिक समस्या के कारण भारत में महिलाओंके खिलाफ चला गया है। अब भारत में प्रसुतीसमय लडका, लडकी का अनुपात १०००:९३३ इतना असंतुलित हो गया है।

bullet गर्भाशय और शिशु की जाँच
पहले तीन महीनों में गर्भावस्था के ठीक-ठाक होने के बारे में पक्का करने के लिए आन्तरिक जाँच ज़रूरी होती है। बाद के तीन महीनों में आन्तरिक जाँच की ज़रूरत यह पता करने के लिए ज़रूरी होती है कि बच्चादानी का मुँह कसी हुई है या शिथिल (ढीली)। सामान्य स्थिति में आप केवल अपनी छोटी उँगली का सिरा ही गर्भाशयग्रीवा में डाल सकते हैं। अगर यह ढीली है तो इस स्थिति में गर्भपात होने का खतरा होता है। ऐसे में माँ को अस्पताल जाने की सलाह दें ताकि उसकी गर्भाशयग्रीवा को कसा जा सके। यौन रोगों के लक्षणों की जाँच करें। कहीं योनि में कोई अल्सर या मांस तो नहीं बढा है? अन्दरूनी जाँच करते समय अच्छे दस्ताने पहनें जो फटे हुए या छेद वाले न हों। एचआईवी एवं हेपटैटिस के संक्रमण से बचाव के लिए यह ज़रूरी है।

bullet प्रथम गर्भस्पन्दन और दिल की धड़कन
पहली बार गर्भवती माँ गर्भ के पाँचवें महीने से गर्भस्थ शिशु का खेलना महसूस कर पाती है। दूसरी बारी की अनुभवी माँ इससे भी पहले से ही यह महसूस कर पाती है। शिशु के दिल की धड़कन एक आले या फीटोस्कोप से छठें महीने से सुनी जा सकती है। कभी इसके लिये डॉपलर मशीन भी कई जगह उपलब्ध होता है। आठवें से नौवें महीने में हम गर्भ के दिल की धड़कन गिन भी सकते हैं। यह सामान्यत: १२० से १६० प्रति मिनट होती है। किस जगह पर शिशु के दिल की धड़कन सुनाई देगी यह इस पर निर्भर करता है कि बच्चेदानी में बच्चे की स्थिति क्या है। आमतौर पर यह नाभि के एक तरफ और काफी नीचे होता है। ऐसा उन शिशुओं में होता है जिनका सिर गर्भाशय में नीचे तरफ हो। उन शिशुओं में दिल की धड़कन नाभि के ऊपर दोनों ओर सुनी जा सकती है जिनका सिर गर्भाशय में छाती की तरफ हो (ब्रीच)।

गर्भाशय के आकार से हमें गर्भावस्था के काल का पता चलता है। अगर गर्भावस्था के किसी काल के हिसाब से गर्भाशय काफी छोटा है तो यह तो शिशु की वृध्दि या फिर गर्भस्थ शिशु के मर जाने के कारण होता है। कभी कभी महिला अपने आखरी माहवारी की तिथी भुलकर गलत बताती है, (इस परिस्थिती में सोनोग्राफी से ही भ्रूण का सही उम्र पता चलता है)। बच्चे की खेलने से और दिल की धड़कन से हमें पता चलता है कि बच्चा जीवित है या नहीं।

bullet गैर ज़रूरी दवाईयाँ देने से बचें
बहुत-सी दवाएँ गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह होती हैं। दुर्भाग्य से ज्यादातर आम चिकित्साकर्मियों को इसका पता नहीं होता। असल में सही नियम यह है कि उन सभी दवाओं और तरीकों का इस्तेमाल न करें जिनके बारे में पक्का न हो कि वो गर्भावस्था में सुरक्षित हैं।

बहुत-सी दवाएँ गर्भावस्था के लिए सुरक्षित नहीं होतीं। यहाँ तक की ऐस्परीन, टैट्रासाइक्लीन, मैबेनडाज़ोल, मैट्रोनिडाज़ोल और हारमोन वाली मुँह से दी जाने वाली दवाएँ नुकसानदेह होती हैं। गर्भावस्था के निदान के लिए एक हारमोन वाली गोली इस्तेमाल होती रही है। माहवारी शुरू करने के लिए गोली और गर्भपात की गोली। भ्रूण के लिए बहुत अधिक नुकसानदेह है। एक्स-रे भी गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक होता है। हालमें जिस महिला को गर्भ अपेक्षित है वह सभी दवाओंसे तबतक बचे रहे। क्लोरोक्विन की गोलियॉं जो मलेरिया के इलाज के लिए दी जाती है, गर्भावस्था में पुरी तरह सुरक्षित है।
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आर्यन गोली से रक्ताल्पता से
हम बच सकते है

 
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