ayurveda icon आधुनिक दवाईयाँ और आयुष
दवाओं के बारे में और कुछ जानकारी दवाओं के अनचाहे असर दवाओं का वर्गीकरण आन्तरिक दवाईयाँ
तीव्रगाही प्रतिक्रिया का इलाज रखरखाव के लिए निर्देश दवाइयों की प्रस्तुति टॉनिक
संक्रमण प्रतिरोधी दवाई एक परिपूर्ण प्रिस्क्रीप्शन दवाएँ कैसे चुने? दवा उद्योग
अप्रशिक्षित डॉक्टर

संक्रमण प्रतिरोधी दवाईयाँ

transition medicines संक्रमण प्रतिरोधी दवाईयाँ का इस्तेमाल सही ढंग से और पूरी अवधी तक होना जरुरी है। असंगत प्रयोग से या कम मात्रा या अवधी के लिये यह दवा लेने से जिवाणू इन दवाओंसे लडना सीख जाते है। उनकी अगली पिढीयॉं इस दवा को बिलकुल ही सह लेती है। इसके कारण अच्छी और सस्ती दवाएँ दिन ब दिन नाकाम हो रही है। दुनिया में यह एक बडा संकट भर रहा है। कुछ वर्ष पहले सुपरबग याने राक्षस जिवाणू का डर फैल गया था। इसका मतलब है किसी भी प्रतिरोधी दवा से न मरनेवाला जिवाणू। यह डर काल्पनिक नहीं किंतू असली है। इसिलिये खास करके जिवाणू रोधी दवाएँ अच्छे डॉक्टरों के या स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के हाथ में ही होना चाहिये।

विश्व स्वास्थ्य संघटन ने आवश्यक या जरुरी दवाओं की एक सूची उपलब्ध की है और हर दो वर्ष इसका पुनर्विलोकन होता है। दवाओं का सही वैज्ञानिक उपयोग होने के लिये निम्नलिखित सूचनाएँ अवश्य ध्यान में रखे।

  • कोई भी दवा जब जरुरी हो तभी लिखनी या इस्तेमाल होनी चाहिये।
  • दवाओं का प्रयोग सही मात्रा में और उचित काल के लिये होना जरुरी है।
  • जिवाणू प्रतिरोधी दवाओं का इस्तेमाल भी ठीक मात्रा में उचित अवधी के लिये और उचित कारणवश करे।
  • सक्षम और सुलभ दवाइयॉं का जादा चलन होना चाहिये।
  • महेंगी दवाओं का प्रयोग कम और सस्ती दवाओं का जादा यह भी एक सूत्र है।
  • जब गोलियॉं, तरल दवा मुँह से लेकर काम चले तब इंजेक्शन को टाल दे।
  • लिखी हुई दवा ठीक से पढकर और सही मात्रा में प्रयोग होना चाहिये।
  • अपनी एक सीमा के बाहर दवाइयों का स्वयं प्रयोग नही करे।
  • बच्चों से दवाइयॉं दूर रखे।
गर्भवती और बच्चोंमें दवाओं का प्रयोग

dama spray हर बच्चा अपने अपने शारीरिक दृष्टी से वयस्कोंसे काफी अलग होता है। बच्चों के विभिन्न अंग पूर्ण रूप से विकसित होने का एक सिलसिला होता है इसिलिये बच्चोंमें खास करके पॉंच वर्ष से कम उम्र में दवाइयों का प्रयोग वयस्कों के अनुसार न करे। इसके लिये डॉक्टर अलग से सोचते है। नवजात शिशुओं में कई दवाईयॉं हानीकारक हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं में कुछ दवाओं का प्रयोग वर्जित है क्यों की इसके बुरे असर गर्भस्थ शिशु को भुगतने पडते है। वैसे ही दूध पिलानेवाली माताओं में कुछ दवाएँ निशिद्ध है इसका पूरा ख्याल रखना चाहिये। कुछ दवाएँ देने के लिये खास तकनीक होती है जैसे दमा के फव्वारे होते है। हर एक मरीज को इसके इस्तेमाल का सही प्रयोग सीखना चाहिये।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

message-icon shyamashtekar@yahoo.com     ashtekar.shyam@gmail.com     bharatswasthya@gmail.com

© 2009 Bharat Swasthya | All Rights Reserved.