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स्वास्थ्यसंवाद
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कई बाते हम नाटकी ढंग से
प्रभावी रूप में कह सकते है

मध्य प्रदेश के कुछ जिलोमें कई देहातो में हठ्ठेकट्टे लोग मरने लगे और कुछ ५०० आदमी और महिलाएँ फेफडों के बीमारी से मर गये, इसकी वजह ढूँढते कार्यकर्ताओं को यह जानकारी मिली की कॉंच के कारखाने में काम करने के बाद ये हुआ है। इसका कारण सिलिकोसिस बीमारी था। इस जानकारी के कारण हजारो और लोग बच गये और एक बडी त्रासदी लगभग रुक सी गयी।

स्वास्थ्य की जानकारी इकट्ठी करना और बॉंटना
opd poster
मरीजों के लिए ओ.पी.डी. में पोस्टर

अक्सर बीमारी दूर करने के लिए दवाइयों से ज़्यादा मददगार जानकारी होती है। उदाहरण के लिए –

  • मलेरिया की रोकथाम मच्छरदानी के जानकारी और इस्तेमाल से आसानी से हो सकती है। ये मलेरिया की दवाइयों की तुलना में सस्ती भी होती हैं।
  • रोज़-रोज़ दॉंतों को ब्रश से साफ करने से दॉंत स्वस्थ रहते हैं जबकि डॉक्टर से दॉंत की मरम्मत करवाना काफी मॅंहगा होता है।

कभी-कभी जानकारी उपलब्ध तो होती है पर उसका इस्तेमाल नहीं होता। इसका इस्तेमाल अनेकों कारकों पर निर्भर होता है जैसे जानकारी देने का सही समय अमल करने की कीमत, उसमें लगने वाला समय और इस्छाशक्ति।

सीखने में लोगों की मदद करना

केवल यही काफी नहीं है कि स्वास्थ्य की जानकारी और निर्देश लोगों तक चेतावनी की तरह पहुँचा दिए जाएँ। लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए ज़रूरी है कि स्वास्थ्य के बारे में समझ बनाने के लिए उनकी लगातार मदद की जाए। स्वास्थ्य शिक्षा का अन्तिम उद्देश्य यह है कि स्वास्थ्य सम्बन्धी मामलों में लोगों के सोचने और उनसे निपटने के ढंग को बदलना। इसके लिए धैर्य, लगातार कोशिश और स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम के लम्बे समय के उद्देश्यों की एक स्पष्ट समझ भी ज़रूरी है। उदाहरण के लिए कोलकता में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सैक्स कार्यकर्ताओं (यौन कर्मी) और उनके ग्राहकों के बीच कोन्डोम बॉंटे गए और क्षेत्र की सभी यौन कर्मियों को इकट्ठा करके उन्हें एड्स की जानकी दी गई। भाग लेने वालों के साथ यह बातचीत भी की गई कि इसमें किस तरह की समस्याएँ आ सकती हैं।

जो लोग यौन कर्मियों के पास जाते हैं उन लोगों के साथ एक नियमित कार्यक्रम तैयार किया गया है। ट्रक वालों की यूनियन से यह प्रार्थना की गई कि वो अपने ट्रकों पर एड्स के खतरों और कोन्डोम के इस्तेमाल के फायदों के बारे में सदेश लिखवाएँ। हालॉंकि इन तरीकों से असुरक्षित यौन सम्बन्ध पूरी तरह से खतम नहीं हो गए परन्तु एड्स के बारे में जानकारी फैलाने में वो काफी मददगार साबित हुए।

लोगों को स्वास्थ्य के विषय में सीखने में मदद करने में नीचे दी गई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • लोग ज़्यादा अच्छी तरह से सीखते हैं अगर भाषण और व्याख्यान सुनने की जगह वो खुद चीज़ें देखें और करें। तरीका ऐसा होना चाहिए कि लोग अपने आप सीख सकें।
  • अमूर्त अवधारणाओं का प्रयोग कम से कम करें। यह बहुत ज़रूरी है कि सन्देश लोगों को समझ आए। हीमोग्लोबिन जैसे अनजाने शब्दों को खून को लाल रंग कहने से मामला आसान हो जाता है।
  • लोगों के लिए अवधारणाएँ समझने के लिए आभासी उपकरण काफी मददगार होते हैं। इसलिए विभिन्न हिस्सों में दर्द और सूजन के बारे में समझाने के लिए मॉडल के विभिन्न हिस्सों को दिखाना या किसी व्यक्ति में शरीर के इन भागों को दिखाना मददगार होता है।
  • मुश्किल आँकड़ों का इस्तेमाल कम से कम करें। किसी के लिए भी विश्वव्यापी और देशभर के आँकड़ों में दिलचस्पी लेना मुश्किल होता है। इस लिए स्थानीय मुद्दों के बारे में बात करें।
  • तकनीकी शब्द और तकनीकी चित्र खास फायदेमन्द नहीं होते। अगर तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करना ही हो तो आसान और जानी पहचानी भाषा के शब्दों का इस्तेमाल करें।
  • सीखने की प्रक्रिया में लोगों को भी शामिल करें। यह ज़रूरी है कि लोगों ने जो सीखा है वो उसे कर के भी देख सकें, गलतियॉं भी करें और फिर उन गलतियों से सीखें। स्वास्थ्य शिक्षा का यह एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं।
  • लोगों के गलत सांस्कृतिक विश्वासों और रहने के ढंग का मज़ाक न उड़ाएँ।
  • स्वास्थ्य को उन के रोज़ के अनुभवों के सन्दर्भ के अनुसार समझाएँ।
  • लोग उस समय सीखने को ज़्यादा तैयार होते हैं जब वो या उनका कोई सम्बन्धी बीमार होता है। इन मौकों का इस्तेमाल संवेदनशीलता के साथ स्वास्थ्य के बारे में बात करने के लिए करें।
  • अनुभव बॉंटे। सीखना हमेशा दो तरफा होता है।
  • आप जो भी सीख रहे हों वही प्रयोग में भी लाएँ।
  • धुम्रपान के हानि के विषय में लोगों को बताकर खुद बीडी-सिगरेट पिएँ तो लोग हमारी बातों को नहीं मानेंगे।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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