पाचन तंत्र के सामान्य विकार
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पाचन संस्था व पाचन तंत्र

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शुद्ध पेयजल से बिमारियॉं कम होती है

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संक्रमण

बच्चों और वयस्कों दोनों में पाचन तंत्र से जुडी बीमारीयो की शिकायत बहुत आम हैं। जीवाणु संक्रमण सबसे आम कारण हैं जो सफाई में कमी के कारण खाने व पानी के ज़रिए से शरीर में प्रवेश कर जाते है। । सार्वजनिक स्थानो की सफाईं के लिए, मनुष्यों और जानवरों के मल मूत्र का सुरक्षित निकास पाचन तंत्र से जुडी बीमारीयो से बचने के लिये सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। ज़्यादातर लोगों के बाहर जाने आने, बाहर खाना खाने और अस्वच्छता के कारण पाचन तंत्र की बीमारियों में बढ़ोतरी होती है। स्वछता, साफ खाने और साफ पानी लेने से इन बीमारियों से हम बच सकते है|

बोरवैलों से आँतों की छूत में काफी कमी आई है क्योंकि जमीन के अन्दर का पानी आमतौर पर साफ, पारदर्शी जीवाणुरहित व सुरक्षित होता है। लोगो में एसिडिटी आम शिकायत है। यह मुख्यत: बहुत अधिक तेज मिर्च और मसाले युक्त भोजन खाने,दवाये के सेवन, दिनभर खाली पेट रहकर पान, पाउच और चाय पीकर लगातार काम करने, अधिक तनाव और शराब पीने के कारण होता है। जठर में छाला(पेप्टिक अल्सर) बैक्टीरिया एच पायलोरी के संक्रमण से होने के संबंध में अब हमें पता है। रोजाना मल त्याग और पेट का खाली हो जाना अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है । आँशिक कब्ज़ भी कई बीमारियों की जड़ माना जाता है। आयुर्वेद में ऐसा माना जाता हैं कि, इन्सान को बहुत सारी बीमारियॉं पाचन तंत्र की गड़बड़ियों के कारण होती हैं। आयुर्वेद में शोधन या साफ करने के लिए कई प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं जैसे कि उल्टी या वमन। योग में भी ऊपर व निचले पेट के शोधन के लिए कई तरीके हैं। डॉक्टर अक्सर पाचन तंत्र की बीमारियों का इलाज करते हुए स्वास्थ्य का यह पहलू भूल जाते हैं । मुँह से लेकर मलद्वार तक पाचन तंत्र का विवरण जीवविज्ञान के अध्याय में दिया हुआ है। कुछ विवरण इस अध्याय में भी हैं ।

मतली और उल्टी आना
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मतली

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उल्टी आना

मतली में उल्टी आने का ही अहसास होता है असल में उल्टी आने से पहले की स्थिति है। मतली और उल्टी नीचे दिए हुए कारणों से हो सकती हैं ।

कारण
  • पेट में किसी अज्ञात पदार्थ या अधिक खाने व पीनेसे बदहज़मी (अपचन)के कारण्मितली या उल्टी हो सकती है।
  • कोई दवा, ज़हर, मसालेदार या अधिक तेल युक्त खाना के सेवन से मितली या उल्टी हो सकती है।
  • पाचन तंत्र के ऊपरी भाग की विशेष संक्रमण बीमारियॉं जैसे , हैजा और अमाशय शोथ (गैस्ट्राइटिस)आदी। पाचन तंत्र में शल्य क्रिया(आप्रेशन) के बाद मितली या उल्टी हो सकती है। पीलिया के कारण से भी मितली या उल्टी हो सकती है|
  • शरीर के अन्य भागों गर्भाश्य, कान जैसे जो कि दिमाग के केन्द्रों से नियन्त्रित होती हैं उदाहरण के लिये गर्भवति महिला को मौरनिंग सिकनेस, , आन्तर कर्ण की बीमारी, मस्तिष्कावरण शोथ ( मैनेनजाइटिस) मस्तिष्क कैंसर आदि।
  • मोशन सिकनेस गाडी की गति से (जहाज,बस,और रेल में लंबा या धुमावदार सफर) या झूले से या गंदगी या बीभत्स द़ृश्य या तेज बदबू के कारण्मितली या उल्टी हो सकती है।
उपचार
  • हमे जितना हो सके लक्षणों व कारणों दोनों को ध्यान में रखते हुअे इलाज करना चाहिए। आमतौर पर उल्टी रोकने की ज़रूरत नहीं होती क्योंकि उल्टी अपने आप ही रूक जाती है।
  • पेट में से अनचाही चीज़ें निकल जाने के बाद मतली और उल्टी आमतौर पर रूक जाती है। सामान्यत: उल्टी के बाद पेट में से अनचाही चीजों से छुटकारा मिलता है। कुछ परिस्थितियों में हमें उल्टी करवाने की भी ज़रूरत पड सकती है। इसलिये हम पानी में नमक मिलाकर कर बना खारा पानी, पिला कर या फिर मॅुह के पिछले हिस्से (पैलेट) में गुदगुदी करके उल्टी करवा सकते हैं।
  • अगर मतली या उल्टी किसी खास बीमारी की वजह से हो रही हो जैसे अमाशय शोथ, हैजा, डण्डुपुच्छ शोथ (अपैन्डेसाइटिस), तो पहले इस रोग का इलाज करना ज़रूरी हैं।
  • मस्तिष्क की गड़बड़ी जैसे मैनेनजाइटिस या दिमाग के ट्यूमर के कारण होने वाली उल्टी, उल्टी की दवाई से रूकती नहीं है। इसके लिए रोगी को किसी विशेषज्ञ से जॉंच व कभी आप्रेशनज़रूरी हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को सुबह सुबह अक्सर मतली आती है इसे चिकित्सीय भाषा मे मौरनिंग सिकनेस कहते है।। इस मौरनिंग सिकनेस के लिए आमतौर पर किसी भी दवा की ज़रूरत नहीं होती। सुबह सुबह कुछ सूखा खाना जैसे बिस्कुट या रोटी खाने से यह तकलीफ ठीक हो जाती है। अगर इससे फायदा न हो तो डोमपेरीडोन की गोली चिकित्सक से परामर्श के बाद देना ज़रूरी है। गर्भवती महिलाओं में बार-बार उल्टी आने का इलाज स्त्री रोग विशेषज्ञ से कराना ज़रूरी है। गर्भवती महिलाओं की यह समस्या आमतौर पर गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के बाद बंद हो जाती है ।
  • पेट में ऐसिडिटी या अम्ल की अधिक मात्रा को। आम तौर पर यह एन्टासिड देने से तुरन्त आराम होता है। साथ में आपको रोगी को आहार संबंधी सलाह भी देनी चाहिए कि वो कैसा खाना खाए। अगर उल्टी में लाल या काले धब्बे मिलें तो यह खून हो सकता है। इसके लिए विशेषज्ञ द्वारा जॉंच करने की ज़रूरत होती है।
  • साथ में उल्टी के सभी रोगी(यों) की निर्जलीकरण की जॉच अवश्य करें, अगर निर्जलीकरण होने लगे तो मुँह से तरल पदार्थ दें।
आयुर्वेद

अगर कोई गम्भीर बीमारी नहीं है तो मतली या उल्टी का इलाज आसान है। इसके लिए आसान घरेलू उपाय भी हैं।

  • खेत की सूखी चिकनी मिटटी का एक टुकड़ा चूल्हे मे जलाकर गर्म करें। चिमटे की मदद से इसे एक जग में डाल दे, जिसमें करीब एक लीटर पानी हो। पानी को कुछ देर के लिए छोड़ दे। फिर इसमें से एक-एक कप हर घण्टे बाद दें। यह सुबह सुबह मतली आने की समस्या के लिए एक बहुत अच्छा व आसान घरेलू इलाज है।
  • मोर का एक पॅंख जलाएँ। राख को शहद में मिलाएँ। इसे चूसने से उल्टी रोकने में मदद मिलती है। इसी से एक आयुर्वेदिक दवा भी बनती है।

उल्टी के एकदम बाद रोगी को बहुत अधिक तरल व ठोस आहार पीने या खाने के लिये उसको मजबूर न करें, इससे मतली व उल्‍टी हो सकती है। पर रोगी थोड़ा-थोड़ा करके तरल पदार्थ के घूँट ले सकता है। उल्टी के लिए कुछ दवाएँ आयुर्वेदिक दुकानों में मिलती हैं जैसे कि वोमिटेब। इन गोलियों को चबाना या निगलना चाहिए।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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