tantrika tantra मस्तिष्क/तंत्रिका तंत्र मानसिक स्वास्थ्य
तंत्रिका तंत्र और उसकी बीमारीयाँ
संरचना और कार्य

brain-spinal-cord मस्तिष्क (दिमाग), मेरुदण्ड और तंत्रिकाएँ (नसें) मिलकर तंत्रिका तंत्र बनाते हैं। यह एक जटिल तंत्र है। इसमें पर्यावरण में होने वाले परिर्वतन जैसे गरमी, ठंड, और सारे शरीर के भीतर के सामान्य जैसे भूख, प्यास आदी और असामान्य संवेदन दर्द,उल्टी आदी के बारे में जानकारी इकट्ठी होती है, यह सारे शरीर के सभी तंत्रो के कामों को संचालित करता है और फैसले लेता है। इस तंत्र की बीमारियों के विभिन्न तरह-तरह के असर होते हैं क्योंकि ’शरीर के तंत्र इसी पर निर्भर होते हैं। अकसर तंत्रिका तंत्र की बीमारियों का अन्य तंत्रों में प्रकट होने वाले लक्षणों से पता चल जाता है। परन्तु मस्तिष्क के बारे में बहुत ही कम पता है। तंत्रिका तंत्र में होने वाली गड़बड़ियों के प्रभाव काफी खास तरह के होते हैं। यह प्रभाव इनमें एक या अधिक हो सकते हैं:

  • सुन्न होना, झुनझुनाहट या संवेदनाहीन होना
  • मॉसपेशियों में कमज़ोरी होना, पक्षाघात।
  • अस्वैच्छिक रूप से (बिना इच्छा के) हिलना-डुलना।
  • मॉसपेशियों का सख्त और अशिथिल हो जाना।
  • इस्तेमाल न होने के कारण किसी अंग का क्षति हो जाना।
  • दौरे।
  • सन्तुलन बिगड़ जाना।
  • दिमागी कामों में रुकावट आना।
  • कुछ खास तरह की सवेदनाओं में रुकावट होना।

तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी के ये स्थानीय लक्षण हैं। इसके अलावा कुछ व्यापक लक्षण भी होते हैं। जैसे कि मस्तिष्क आवरण शोथ (मैनेनजाईटिस) और मस्तिष्क शोथ (ऐनसेफैलाईटिस) में बुखार और उल्टियाँ होती हैं।

तंत्रिका तंत्र के मुख्य काम

तंत्रिका तंत्र के मुख्य काम हैं – सारी जानकारी अंगो से दिमाग में संवेदी तंत्रीकाओ द्वारा पहुँचती है। देखना, सुनना, स्वाद, सूँघना, छूना, दर्द और तापमान का अन्दाज़ वो संवेदनाएँ हैं जिनसे हमें आसपास की दुनिया का पता चलता है। कान, नाक और जीभ मस्तिष्क से खास कपाल की तंत्रिकाओं द्वारा जुड़े रहते हैं। त्वचा और आन्तरिक अंग अपने सन्देश मस्तिष्क तक मेरुदण्ड के द्वारा पहुँचाते हैं।

मस्तिष्क की तंत्रिकाएँ शरीर के भीतर और बाहर से प्राप्त कर सारे संवदेन को ग्रहण कर दिमाग की स्मरण शक्ति से तुलना करती है और सन्देशो पर फिर एक चिन्तन कर समझती हैं और शरीर को कौन सी क्रिया करना है वह आदेश देती हैं और फिर शरीर संबंधित मॉसपेशी(यॉ) के संकुचन या ग्रंथी के स्त्राव से प्रतिक्रिया करता है जो क्रिया के रूप में दिख्ता है जैसे चलना या पसीना आना या पेट में मरोड होना या दस्त लगना। भावनाएँ, नींद, सन्तुलन, आन्तरिक अंगों पर नियंत्रण, यह भी मस्तिष्क के महत्वपूर्ण काम हैं।

चमडी के नीचे की अन्तिम सिरे वाली तंत्रिकाएँ गर्मी महसूस करती हैं और दिमाग के उष्म केंद् तक सन्देश पहुँचाती हैं । उष्म केन्द्र मौसम के तापमान अनुसार गर्मी में पसीने की ग्रंथि से पसीने निकालना या सर्दीयो में रक्त वाहिनियों में संकुचन कर शरीर की भीतर की गर्मी को बचाती है।

तंत्रिका तंत्र की संरचना और शरीर क्रिया विज्ञान

मस्तिष्क और मेरुदण्ड मिलकर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र बनाते हैं। तंत्रिकाओं की जड़ें, परिसरीय तंत्रिकाएँ और तंत्रिका तन्तु मिलकर परिसरीय तंत्रिका तंत्र बनता हैं। आम पाँच मुख्य संवेदी अंगों (त्वचा, ऑंखों, कानों, जीभ और नाक) के बारे में अन्य अध्यायों में पढ़ेंगे।

मस्तिष्क

brain मस्तिष्क को मुख्यत: तीन भागों में बाँटा जाता है _ अग्र, मध्य और पश्चमस्तिष्क। ब्रेन स्टैम शरीर के सभी मूल काम करता है जैसे श्वसन, संचरण और पाचन।

कम विकसित जानवरों जैसे गाय, घोड़ों, कुत्तों और चूहों में सैरिब्रम छोटा होता है। संवेदना और चालन कार्य सेरेब्रम के मध्य से संचालित होते हैं। अग्रमस्तिष्क सेरेबेरम का हिस्सा होता है। जो सभी बौध्दिक और भावनात्मक कार्य करता है। अग्रमस्तिष्क फोरब्रेन ही मनुष्यों को अन्य जीवों से अलग करता है। अनुमस्तिष्क (सैरिबैलम)-कोई इसे लघुमस्तिष्क भी कहते है– से सन्तुलन का नियंत्रण होता है। मस्तिष्क को दाहिने और बायें भागों में बाँटा जाता है। ये शरीर में अपने से दूसरी तरफ के काम संचालित करते हैं (सिर्फ सिर को छोड़कर) यानि कि बाँयी ओर का भाग शरीर के दायें भाग के कामों का नियंत्रण करता है।

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मस्तिष्क का अंदरुनी वायरिंग

परन्तु दोनों ओर के मस्तिष्क में कुछ महत्वपूर्ण अन्तर हैं। बाँयी मस्तिष्क आम तौर पर ज्यादा प्रबल होती है और इसी से बोलने, बौध्दिक कार्यों और गणितीय कामों का नियंत्रण होता है। दायीं मस्तिष्क (आमतौर पर अप्रभावी) होती है और यह भावनाओं और कलात्मक पहलुओं को सम्भालती है। लोगों में बायीं ओर के अग्र मस्तिष्क से बोलने की क्षमता नियंत्रित होती है। सुनने के लिए पार्श्विका खण्ड (कानों के ठीक ऊपर) हैं तो देखने के लिए पश्चकपाल खण्ड मस्तिष्क के पीछे की तरफ होते हैं।

शरीर के कुछ हिस्सों को मस्तिष्क में ज्यादा भाग मिला होता है। जैसे कि हाथों और पैरों को मस्तिष्क में काफी ज्यादा हिस्सा मिला होता है तो पीठ को काफी कम। यह सब एक भाग की तुलना में दूसरे की संवेदनशीलता और काम करने की बारीकी पर निर्भर करता है। जैसे कि हाथ लिखने के लिए पैरों के मुकाबले बेहतर काम कर रहे होते हैं।

मस्तिष्क आवरण (मस्तिष्क को ढँकने वाली और बॉधने वाली परत)

मस्तिष्क का गढापन दही जैसा होता है जो स्थिर नही होता मस्तिष्क आवरण की तीन तहें मस्तिष्क को ढँक कर उसे स्थिर करती हैं। उनमें से भीतरी आवरण मस्तिष्क से चिपका रहता है। दूसरी आवरण कपाल के भीतरी भाग से चिपका रहता है। बीच का आवरण खाली स्थानों को घेरे रहती है और मस्तिष्क बाहरी दबाव और धक्को को कुशन-संरक्षण उपलब्ध करवाती है।

 

डॉ. शाम अष्टेकर २१, चेरी हिल सोसायटी, पाईपलाईन रोड, आनंदवल्ली, गंगापूर रोड, नाशिक ४२२ ०१३. महाराष्ट्र, भारत

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